Sub Lila Ram (RETD) Para SF – Inspirational Army Officer – GIAA 2026
“बलिदान”………………
छाताधारी सूबेदार लीलाराम 2000 से 2006 तक 50 स्वतंत्रता छाताधारी ब्रिगेड में तैनात रहे। इस दौरान उन्होंने “OP PARAKAM”, “OP RAKSHAK” और EX INDIRA में RUSSIA के साथ बढ़-चढ़कर भाग लिया।
उसके बाद फरवरी 2006 से अक्टूबर 2006 तक “UN MISSION” में “UNDOF HQ” सीरिया में CWO LOGISTICS के पद पर तैनात रहे। कार्य का सराहना और मेहनत के लिए Lt Gen BALANAND SHARMA, FORCE COMMANDER द्वारा प्रशस्ति पत्र से नवाजा गया।
नवंबर 2006 में 212 पेट्रोलियम प्लाटून उदयपुर में तैनात थे। 14 मार्च 2007 को रिफ्रेशर जंप और अपने बच्चों को आगरा से उदयपुर लेने के लिए आया था। 15 मार्च 2007 को रेलयात्रा के दौरान ईदगाह-आगरा फोर्ट स्टेशन से पहले कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा एक औरत के गले से चेन झपट कर भागने की कोशिश की, तो मैंने अदम्य साहस और फौजी कर्तव्य परायणता दिखाते हुए उसको पकड़ा। तो असामाजिक तत्वों ने चलती गाड़ी से धक्का दे दिया, जिसकी वजह से दोनों पैर गंवाने पड़े।
उसके बावजूद 2008-09 में QMTI पुणे से हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर का कोर्स किया। उसी दौरान बास्केटबॉल तथा तैराकी में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
नवंबर-दिसम्बर 2009 में “पैरा उड़ान” के आयोजन पर 20 दिन पैरा ट्रेनिंग स्कूल (PTS), आगरा में ग्राउंड ट्रेनिंग की और ट्रायल जंप हुआ। सुविधाओं की कमी के कारण मुख्य जंप सम्पन्न नहीं हो पाया, नहीं तो आज मेरा भी नाम “गिनीज बुक” में दर्ज होता।
23 फरवरी 2010 को 100% अपंगता के आधार पर सेना से सेवा निवृत्त कर दिया गया। उसके बावजूद संघर्ष जारी रहा। प्रथम सेवा “सेना सेवा कोर” (A.S.C.) में 27 वर्ष के बाद दूसरी सेवा E.M.E. के 509 सेना आधार कार्यशाला में कर्म ही धर्म के रूप में मार्च 2012 से LDC (क्लर्क) के पद पर आज तक कर रहा हूँ।
दो बच्चे हैं, दोनों ही देश की सेवा कर रहे हैं। बड़ा सेना में कैप्टन है और दूसरा सिपाही जो कि नेशनल बॉक्सर है। पत्नी राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी होने के बावजूद साधारण गृहणी हैं।